किताबे

किताबे तो बड़ी होती गयी सारी
वज़न बढ़ता गया उनका
मेरा बस्ता पुराना हो रहा था , फट रहा था
ना जाने कहा गिर पड़ा टुकड़ा वो मेरा आसमां का ..

Comments

3 responses to “किताबे”

  1. Sonit Bopche Avatar
    Sonit Bopche

    कम शब्दों में बहुत सुंदर तरीके से काफ़ी कुछ कह दिया आपने. बहुत खूब.

  2. Dev Kumar Avatar
    Dev Kumar

    Asm Ji

  3. Ritu Soni Avatar
    Ritu Soni

    Very nice

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