किताबे तो बड़ी होती गयी सारी
वज़न बढ़ता गया उनका
मेरा बस्ता पुराना हो रहा था , फट रहा था
ना जाने कहा गिर पड़ा टुकड़ा वो मेरा आसमां का ..
किताबे
Comments
3 responses to “किताबे”
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कम शब्दों में बहुत सुंदर तरीके से काफ़ी कुछ कह दिया आपने. बहुत खूब.
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Asm Ji
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Very nice
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