कोई नहीं जानता ख्वाहिशें मेरी
अनजान है सब मेरे ख्वाबों से
मेरे अश्कों को पानी समझती है दुनिया
किनारे रहते है लोग मेरी मझंधारों से
Author: Sonia Kulshrestha
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किनारे रहते है लोग मेरी मझंधारों से
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न तुम जी पाये, न मैं जी पायी
बहुत सारी बातें है जो कहनी थी
बहुत कुछ सुनना था तुमसे
मगर कुछ न तुमने कहा
न मैं ही कुछ बोल पायी
जिंदगी गुजरती गयी चंद लम्हों में बटकर
न तुम जी पाये, न मैं जी पायी|