कोई नहीं जानता ख्वाहिशें मेरी
अनजान है सब मेरे ख्वाबों से
मेरे अश्कों को पानी समझती है दुनिया
किनारे रहते है लोग मेरी मझंधारों से
किनारे रहते है लोग मेरी मझंधारों से
Comments
8 responses to “किनारे रहते है लोग मेरी मझंधारों से”
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nice
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thanks anupriya
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मनभावन अल्फ़ाज़….
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thanks 🙂
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bahut khoob…umda rachan!
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thanks
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bht khoob sonia ji 🙂
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thank you
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