बाबुषा कोहली के साथ एक शाम बात ये 2017 की थी मैं साहित्य की साइटें खोज रहा था गूगल को खूब टटोल रहा था मिली मुझे फिर इसमें सफलता अच्छी रचनाओं का था उसमें छत्ता […]

तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती बशर्ते तुमने सीता और अहिल्या की बजाय द्रौपदी का अनुसरण किया होता रानी झांसी की तरह लड़ा होता माना […]

पहचान बड़ी कोशिशें की खुद को जानने की पहचानने की ज्ञानियों से चर्चा की पोथियाँ पढ़ी ध्यान लगाया पर आज जब बाजार गई तो समझ आया कि मैं ब्लाउज और पेटीकोट हूँ इससे अधिक कुछ […]

वर्जिन मैं वर्जिन हूँ विवाह के इतने वर्षों के पश्चात् भी मैं वर्जिन हूँ संतानों की उत्पत्ति के बाद भी। वो जो तथाकथित प्रेम था वो तो मिलन था भौतिक गुणों का और यह जो […]

सुनो अमृता! सुनो अमृता! अच्छा हुआ जो तुम लेखिका थी क्योंकि अगर तुम लेखिका न होती तो निश्चित तौर तुम्हें चरित्रहीन और बदलचलन की श्रेणी में रखा जाता। अच्छा हुआ तुम असाधारण थी क्योंकि साधारण […]

वह बच सकती थी!!! वह बच सकती थी अगर वह चिल्ला सकती उस दिन जब खेल खेल में किरायेदार अंकल उसे गोद मे उठा दुलारने लगे और वह दुलार जब तकलीफदेह होने लगा तब वह […]