उनकी सुनते सुनते हमारी उम्र निकल गयी
हमारे दिल की न सुनी उन्होने एक भी बार
Author: Sumit Nanda
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हमारे दिल की न सुनी उन्होने एक भी बार
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अकेले होने का यह मरहला मुसलसल है
अकेले होने का यह मरहला मुसलसल है
यहां किसी को किसी का ख्याल कब कुछ है -
जब भरोसा उठ जाए, तो खुद के पास खुदा रखना
तुम अपने गिर्द हिसारों का सिलसिला रखना
मगर हमारे लिये कोई रास्ता रखनाज्यादा देर तक जुल्म नहीं सह सकता मैं
अब अगर आयें कडे दिन तो दिल कडा रखनातुम्हारे साथ सदा रह सकें जरूरी नहीं
अकेलेपन में कोई दोस्त दूसरा रखनावो कहते हैं न कि जिसका कोई नहीं खुदा होता है
जब भरोसा उठ जाए, तो खुद के पास खुदा रखना -
लम्हा लम्हा जीने वालों का मक़ां कोई नहीं
वह रहे कैदे जमां में जो मकीने आम हो
लम्हा लम्हा जीने वालों का मक़ां कोई नहीं