प्रिय स्त्री, तुम्हारा प्रेम हमेशा कोमल क्यों है? क्यों नहीं तुम भी दुनिया के तर्कों और व्यावहारिकता की चाशनी में प्रेम को डूबा कर कठोर बना पाई? वो मीठास तो फिर भी रहती ही न, […]