“मैं”-१

वक्त की कलम से जिन्दगी के हँसी पल लिखने जा रहा हूँ मैं, गमों की परछाई पर खुशियों के साये सा छाने जा रहा हूँ…

मुलाकात

जिनके आने के ख्वाब में हम पलकों को बिछाये बैठे हैं , वो किसी और के ख्वाबों को पलकों पर सजायें बैठे हैं चलों ये…

“पतझड़”

मासूम निगाहें पलकों पर आश सजोयें अब भी राह ताकती होंगी, सबके खो जाने के गम में छुप – छुप  कर  दर्द  बाँटती  होंगी, वो…

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