बहूत डरावना भयानक रात देखनी हइ जब ओके आज असपताल के एगो कोना मे चिखत रहे लेके धिरे धिरे सास दरद पिडा के रहे समूंदर हर पल उठत रहे ओकरा अंदर देख के ओके जि […]

“नून” भोजपुरी कविता इक दिन बहुत हाहाकार मचल भात ,दाल ,तरकारी में। काहे भैया नून रूठल बा बैठक भईल थारी में। दाल- तरकारी गुहार लगईलक नून के बैठ गोर थारी में तरकारी कहलक सांस छूटता […]