एक तरफ धरती मा की करणवयथा तौ दूसरी तरफ मानवमन है। जौ मन मौसकर और सर पकडकर रौ रहा है। धरती के लाल धरती की तरफ देखकर यह कैसी घडी है। बाहार हन जल की […]