Yogesh kumar Dhruw's Posts

गांव याद आये

“गाँव याद आये” ************** हमें क्या पता आज,ये दिन देखना पड़ेगा | न जाने कैसी मजाक,आज तूने किया है || हँसते हुए निकले घर से,भूख मिटाने सभी | गाँव घर ये आँगन,छोड़ चार पैसा कमाने || दूर तलक परदेश,सभी हर कोने-कोने गए | खेत खलिहान ले याद,बूढ़ी अम्मा की प्यार | काम की धुन काम करता,कोई चलता गया | मजबूरी मे हमें आज,मजदूरी दूर करना पड़ा || घोर अंधियारा छाए,ये काली रात आज कैसी | पसंद न आए तुझे ह... »

ओ बीते दिन

ओ बीते दिन ये उन दिनों की बात है,जब बेरोजगारी का आलम पूरे तन मन मे माधव के दीमक में घोर कर गया था,घर की परिस्थिति भी उतना अच्छा नही था कि वे निठल्ला घूम सके……. …क्योंकि बाबू जी कृषि मजदूरी करके पूरे परिवार का भरण पोषण कर अपने फर्ज को निभा रहे थे । और इधर माधव गाँव मे ही रह कर पढ़ाई के साथ-साथ अपने माँ के साथ घर के हर कामो में हाथ बटाते.और इसी तरह उन्होंने हायर सेकेंडरी स्तर तक कि ... »

मोर मन के परेवना

मोर मनके परेवना ★★★★★★★ कोयली कस कुहकत जीवरा के मैना न | महकत अमरैय्या गोंदा तय फूले जोहि || मोर मन म बसे हिरदे के परेवना ओ | संगी घलो हर झूमत नजरे नजर म न || लाली कस परसा दिखत रुपे ह तोरे ओ | दिखत रिकबिक घलो टिकली सिंगारे ह || तोरेच आगोरा म जीवरा ह संगवारी न | कलपत हिरदे हावे रतिहा आगोरा ओ || नइ मिले थोड़कुन आरो ह तोरेच जोहि | मन मे पीरा घलो मन कुमलाये भारी न || तिहि मोर परेवना अस सुवा तय मोर घलो ... »

मां तू मां है

“माँ तू माँ है” योगेश ध्रुव”भीम” ************************ माँ तू जननी है, तूने मुझे, कोख में, पाला, नौ माह तक, जन्म दी, इस वसुंधरा का, दर्शन कराई, जननी हो न, खुद दुख सहकर, सुख का भोग कराई, हाँ माँ, नदियों के नीर की, निर्मलता की धार हो, शीतल चन्दन हो तुम, तू ही तो हो, मुझे चलना सिखाई मेरे हर पगो का सहारा बनी, मुझे बातें करना सिखाई, हाँ माँ, मुझे सिखाई बाते करना, मैं आपके बाग... »

इम्तिहा

“इम्तिहा” योगेश ध्रुव “भीम” “जिंदगी की डोर खिंचते चल पड़े हम, मंजिल की तलाश पैरो पर छाले पड़े” “बिलखते हुए सवाल लिए पापी पेट का, दर-दर भटकते लेकिन हल ढूढ़ते ढूढ़ते” “चिराग जलाते हुए जीने की तमन्ना लिए, दर्द बयाँ करू कैसे चिराग तु बुझाते चले” “डगर भी कठिन इम्तिहा की मौन है हम, मेरे परवर दिगार रहम नाचीज पे तू कर” »

पथ के राही न भटक

=राही पथ से न भटक=योगेश ध्रुव”भीम” ××××××××××××××× अडिग मन राह शांत हो, निश्छल जीवन लेकर चल, चाहे भटके मन: चंचल, जीवन नाथ के तू चल, पथ के राही न भटक ऐसे पथ में तू चल || न डिगा अपना नियत, ऐसे नियति बना कर चल, मिला जीवन सौभाग्य पूर्ण यह, दुर्भाग्य गर्त में न डाल के चल, पथ के राही न भटक, ऐसे पथ में तू चल || लक्ष्य ऐसा अडिग कल्पना , ऐसे मूरत बना के चल, कल्पना की कामयाबी, सकार जीवन लेकर चल,... »

नारी

“नारी” प्रकृति सा कोमल तुम, मेरु समान दृढ़ता लिए, नीर सा निर्मल हो तुम, नारी तुम न हारी हो || अन्धकार की दीपक, निश्च्छलता की मूरत, सोये मन की आशा हो, नारी तुम न हारी हो || वसुंधरा की शोभा हो, वात्सल्य मयी ममता, धिरजता की मूरत धर, नारी तुम न हारी हो || अर्धनारेश्वर में तुम तो, नर नारी के रूप लिए, जननी तुम तो जननी, तुम बीन अधूरी सृष्टि, नारी तुम न हारी हो || योगेश ध्रुव”भीम” »

हमन प्रबुधिया नोएन गा

“हमन परबुधिया नोएन गा” ************************** जांगर पेरत पसीना चुचवावत, भुइय्या के छाती म अन उगावत, चटनी बासी के खवैय्या आवन न, येहर धान के कटोरा हावे गा, हमन परबुधिया नोएन रे, सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा || मोर छाती म बिजली पानी, रुख राई अउ जंगल झाड़ी, कोयला के खदान हावे गा, हमन परबुधिया नोएन रे, सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा || चारो मुड़ा हे नदिया नरवा, हीरा लोहा टिन के भंडार हावे, इहाँ ... »