वहि घरका ना जाउ कबहुं
जहां ना होइ सम्मान
नीके जहां कोइ नाइ मिलइ
हुंआँ जाइते हइ अपमान
रूखी-सुखी खाइ लेउ
बढ़िया व्यंजन छोड़ि
प्रेम की छूड़ी रोटी
छप्पनभोग सि बढ़िया होइ
आधी राति का आवेते
घरवाली होति हइ दिक्क
तउ जल्दी घर जावै लगउ
नइ रातिक होई खिटि-पिट्टी ।
Category: अवधी
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वहि घरका ना जाउ कबहुँ
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अम्मा भई बाँवली..
सीतापुरिया अवधि:-
राति क द्याखँइ चांद-सितारा
दिनमाँ चांद निहारइ
दिन भरि छोटुआ-छोटुआ
कहिके अम्मा लाल पुकारइ
अम्मा भई बाँवली।
टूटी खटिया फटी चटाई
जब अम्मा पहुड़इ
चरमर-चरमर होइगइ पाई।
अम्मा भाई बाँवली…
घुटनन माँ तनिकऊ
बूत नाइ
तबहूँ लाठी लइकई
दिनु भरि
आइसी–वइसी दऊरईं ।
अम्मा भई बाँवरी…
बहुरिया लईके आवइ खाना
बुदु बुदु बुदु बुदु
अम्मा ब्वालई।
अम्मा भई बाँवली… -
अम्मा भई बाँवली..
सीतापुरिया अवधि:-
राति क द्याखँइ चांद-सितारा
दिनमाँ चांद निहारइ
दिन भरि छोटुआ-छोटुआ
कहिके अम्मा लाल पुकारइ
अम्मा भई बाँवली।
टूटी खटिया फटी चटाई
जब अम्मा पहुड़इ
चरमर-चरमर होइगइ पाई।
अम्मा भाई बाँवली…
घुटनन माँ तनिकऊ
बूत नाइ
तबहूँ लाठी लाइकई
दिनु भरि
आइसी–वइसी दऊरईं ।
अम्मा भई बाँवरी…
बहुरिया लईके आवइ
बुदु बुदु बुदु बुदु
अम्मा ब्वालई।
अम्मा भई बाँवली…