अवधी

पप्पू प्रधान

पप्पू परधानी मा खड़ा हयिन जनता के गोडे मा पड़ा हयिन जनता ताई वय लड़ा हयिन जनता ताई वय खड़ा हयिन जितय ताई वय हैरान हयिन पूर्व परधान से परेशान हयिन भावी परधान लिखाए लिहिन गली मा पोस्टर चिपकाए दिहिन हर देवी देवता का मनाय लिहिन चुनाव के एक दिन पहिले दारू मुर्गा बटवाय दिहिन होईगा चुनाव जब रिज़ल्ट आवा पप्पू परधानी जीत गए जनता से जवन किए रहे वादा वाका एक घूंट मा पी गए अब जनता से हैरान होई गए जनता से परेश... »

पुलिस दरोगा भऊजी

सीतापुरिया अवधी रचना = “हमरी तऊ पुलिस दरोगा भऊजी” अउरेन की भऊजी जेलि करउती, हमरी तऊ पुलिस, दरोगा भऊजी। दिनु भरि स्वावईं अईसी-वईसी, पहरा राति लगावई भऊजी। भईया बाहेर तानाशाह बनति हँई, उँगरिन नाचु नचावई भऊजी। सीधी-साधी जेलि करउती, हमरी तऊ पुलिस, दरोगा भऊजी। कबहूँ हंसावई कबहूँ रोवावँई, कठपुतली तना नचावँई भऊजी। सास क त्वारँईं, नंद कच्वाटँई, सब पर धाक जमावँई भऊजी। »

दोहा

सुनि हनुमत के बचन सिय देखहिं चारिउ ओर। अति लघु रूप धरि प्रगटे हनुमत सिय के कर जोर।। »

सुनहु जानकी मातु मैं

सुनहु जानकी मातु मैं हूँ रघुवर का दास। करता हूँ सेवा सदा रहता चरनन के पास।। »

इनके तीर(पास)

चीन होइ या पाकिस्तान होइ इनके तीर(पास) खाली दहशतगर्दइ हँइ कोई अउर कामु तऊ आवति नाइ खाली दिमाग शैतान केर घर होति हई। तबहें तऊ चारिउ ओर खाली आतंकवाद फैलावति हँइ »

ए हो पिया!

बदरी घिरि आई ए हो पिया! रिमझिम बरसत छम से बदरिया »

तुम आए

तुम आए बदरा छाए नैनमा दीप जले गेहूं की बाली खेतन मां लहराए जब लागी प्रीत बिरहा की तो फसल ओला से गिर जावे मनमोहन तेरी आंख है बस तुम पर विश्वास है कर दो मेरी कुछ चाकरी बन सुदामा मैं तुम्हारी उतारू आरती »

31 मई

हम नाइ खाइब आजु ते तंबाकू तुमहू छोड़ि देउ ओ बाबू »

31 मई

हम नाइ खाइब आजु ते तंबाकू तुमहू छोड़ि देउ ओ बाबू »

हमरी सुधि

अपने-अपने मां सब परे हमरी सुधि नाइ कोई लेइ। ओ बांसुरी बजावई वाले तनिक हमरीउ सुधि लेउ।। »

हमहे देखी

वईसी डेरु बईठा अइसी शरम हमका घेरे हई ना वई द्याखइ ना हमहे देखी »

सावित्री वट पूजा

हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । सावित्री पूजा,कईसे पूजई जाई? बरगद की डाढ़ मगाई या फिरी, बरगद के नीचे जाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । चारि बजे ते पुलिस लागि हई , पूजा कईसे करि पाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । साज-श्रिगार सबई करि बईठेन , फेरा कईसे लगाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । »

हमते घरइतिनि

हमते घरइतिनि रोज़ु-रोजु कहति हइ , घुमावइ लई चलउ कहूँ । लॉक डाउन मा ऊबि गयेन हई , मईके कइसेऊ भेजि देउ तुम । हमका करी जब हमका पुलिस वाले रगदइहंइ , का करिबा जब दुई-चारि लाठी धरि दीहंइ । तनिकऊ संदेहु भवा तउ क्वारंटाइन करि दीहंइ । »

हमका देखि बोलीं भऊजी !!

सीतापुरिया अवधी बोली:- हमका देखि बोलीं भऊजी काहे नाई सोउती हऊ तुम ? राति-राति भरि किटिपिटि- किटिपिटि फोन म का लिखती हउ तुम? हम बोलेन ओ भाउजी ! थोरी-बारी कविता लिखा करिति हन हम, घर बाईठे ऑनलाइन कपड़ा द्यखा करिति हन हम। वइ बोलीं हमकउ सिखाई देऊ हमहूं कपड़ा देखिबि, जऊनी साड़ी नीकी लगिहँई तुमरे दद्दा तेने कहिके मंगाई लीबि। हम कहेन ठीक भऊजी अब हमका जाइ देउ, कुछु टूटी-फाटी कवितन का हमका लिखइ देउ । »

वहि घरका ना जाउ कबहुँ

वहि घरका ना जाउ कबहुं जहां ना होइ सम्मान नीके जहां कोइ नाइ मिलइ हुंआँ जाइते हइ अपमान रूखी-सुखी खाइ लेउ बढ़िया व्यंजन छोड़ि प्रेम की छूड़ी रोटी छप्पनभोग सि बढ़िया होइ आधी राति का आवेते घरवाली होति हइ दिक्क तउ जल्दी घर जावै लगउ नइ रातिक होई खिटि-पिट्टी । »

अम्मा भई बाँवली..

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ बूत नाइ तबहूँ लाठी लइकई दिनु भरि आइसी–वइसी दऊरईं । अम्मा भई बाँवरी… बहुरिया लईके आवइ खाना बुदु बुदु बुदु बुदु अम्मा ब्वालई। अम्मा भई बाँवली… »

अम्मा भई बाँवली..

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ बूत नाइ तबहूँ लाठी लाइकई दिनु भरि आइसी–वइसी दऊरईं । अम्मा भई बाँवरी… बहुरिया लईके आवइ बुदु बुदु बुदु बुदु अम्मा ब्वालई। अम्मा भई बाँवली… »