आगे पीछे दरख्तों की हरियाली रखो, सनातन संस्कृति की खुशहाली देखो। हर घर में ज्ञान का दीप जलाओ, शिक्षा और जागरण का मार्ग दिखाओ। आंदोलन का बिगुल बजाओ, परिवर्तन लाओ, अपने अधिकारों के लिए आवाज […]

पापा की खेती, धूप में सोना हर सुबह उठते ही हल चलाते बियाबान खेतों में बूंदों की टोपी मेहनत की बूँदें, हर दाने में ट्रैक्टर की आवाज़, गूँजती सवेरा पसीने की महक, मिट्टी की खुशबू […]

जियरा हमरा जुड़ईहई हमार पिया अंखियां तोसे जो मिलिहई हमार पिया। तुम तऊ लाएउ हमरी सौतनिया दुलहा हमरऊ तऊअई हई हमार पिया। बात मा सौ की ना तुम आयेउ तुमका वा भरमई हई हमार पिया। […]

तस्वीरों से बतिया के देखो अक्स रूह तक हो आएगी आईने मैं कतरा बहा कर देखो खोई से तेरी झलक आएगी साहिलों से लड़ के हारे भी हो अगर फिर महकने की ख्वाहिश सता जायेगी!!!

नहीं चाह रही इस जीवन की भर गई समर्पण की गगरी अब पछताए क्या होवे है जो रोवे है सो खोवे है तीर लगा इस पाथर को पाथर में भी जान तो होवे है अबका […]

अवध में बाजे चहुँ ओर बधइया। राजा दशरथ के भवन में जन्म लियो चारों भैया ब्रह्मा, विष्णु, शंकर नाचत धन्य कौशल्या मैया अवध में बाजे चहुँ ओर बधइया। भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न राम के छोटे-छोटे […]

पप्पू परधानी मा खड़ा हयिन जनता के गोडे मा पड़ा हयिन जनता ताई वय लड़ा हयिन जनता ताई वय खड़ा हयिन जितय ताई वय हैरान हयिन पूर्व परधान से परेशान हयिन भावी परधान लिखाए लिहिन […]

सीतापुरिया अवधी रचना = “हमरी तऊ पुलिस दरोगा भऊजी” अउरेन की भऊजी जेलि करउती, हमरी तऊ पुलिस, दरोगा भऊजी। दिनु भरि स्वावईं अईसी-वईसी, पहरा राति लगावई भऊजी। भईया बाहेर तानाशाह बनति हँई, उँगरिन नाचु नचावई […]

चीन होइ या पाकिस्तान होइ इनके तीर(पास) खाली दहशतगर्दइ हँइ कोई अउर कामु तऊ आवति नाइ खाली दिमाग शैतान केर घर होति हई। तबहें तऊ चारिउ ओर खाली आतंकवाद फैलावति हँइ

तुम आए बदरा छाए नैनमा दीप जले गेहूं की बाली खेतन मां लहराए जब लागी प्रीत बिरहा की तो फसल ओला से गिर जावे मनमोहन तेरी आंख है बस तुम पर विश्वास है कर दो […]

हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । सावित्री पूजा,कईसे पूजई जाई? बरगद की डाढ़ मगाई या फिरी, बरगद के नीचे जाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । चारि बजे ते पुलिस लागि हई , […]

हमते घरइतिनि रोज़ु-रोजु कहति हइ , घुमावइ लई चलउ कहूँ । लॉक डाउन मा ऊबि गयेन हई , मईके कइसेऊ भेजि देउ तुम । हमका करी जब हमका पुलिस वाले रगदइहंइ , का करिबा जब […]

सीतापुरिया अवधी बोली:- हमका देखि बोलीं भऊजी काहे नाई सोउती हऊ तुम ? राति-राति भरि किटिपिटि- किटिपिटि फोन म का लिखती हउ तुम? हम बोलेन ओ भाउजी ! थोरी-बारी कविता लिखा करिति हन हम, घर […]

वहि घरका ना जाउ कबहुं जहां ना होइ सम्मान नीके जहां कोइ नाइ मिलइ हुंआँ जाइते हइ अपमान रूखी-सुखी खाइ लेउ बढ़िया व्यंजन छोड़ि प्रेम की छूड़ी रोटी छप्पनभोग सि बढ़िया होइ आधी राति का […]

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ […]

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ […]