अवधी

सावित्री वट पूजा

हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । सावित्री पूजा,कईसे पूजई जाई? बरगद की डाढ़ मगाई या फिरी, बरगद के नीचे जाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । चारि बजे ते पुलिस लागि हई , पूजा कईसे करि पाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । साज-श्रिगार सबई करि बईठेन , फेरा कईसे लगाई। हे सखी! कौनी विधि पूजई जाई । »

हमते घरइतिनि

हमते घरइतिनि रोज़ु-रोजु कहति हइ , घुमावइ लई चलउ कहूँ । लॉक डाउन मा ऊबि गयेन हई , मईके कइसेऊ भेजि देउ तुम । हमका करी जब हमका पुलिस वाले रगदइहंइ , का करिबा जब दुई-चारि लाठी धरि दीहंइ । तनिकऊ संदेहु भवा तउ क्वारंटाइन करि दीहंइ । »

हमका देखि बोलीं भऊजी !!

सीतापुरिया अवधी बोली:- हमका देखि बोलीं भऊजी काहे नाई सोउती हऊ तुम ? राति-राति भरि किटिपिटि- किटिपिटि फोन म का लिखती हउ तुम? हम बोलेन ओ भाउजी ! थोरी-बारी कविता लिखा करिति हन हम, घर बाईठे ऑनलाइन कपड़ा द्यखा करिति हन हम। वइ बोलीं हमकउ सिखाई देऊ हमहूं कपड़ा देखिबि, जऊनी साड़ी नीकी लगिहँई तुमरे दद्दा तेने कहिके मंगाई लीबि। हम कहेन ठीक भऊजी अब हमका जाइ देउ, कुछु टूटी-फाटी कवितन का हमका लिखइ देउ । »

वहि घरका ना जाउ कबहुँ

वहि घरका ना जाउ कबहुं जहां ना होइ सम्मान नीके जहां कोइ नाइ मिलइ हुंआँ जाइते हइ अपमान रूखी-सुखी खाइ लेउ बढ़िया व्यंजन छोड़ि प्रेम की छूड़ी रोटी छप्पनभोग सि बढ़िया होइ आधी राति का आवेते घरवाली होति हइ दिक्क तउ जल्दी घर जावै लगउ नइ रातिक होई खिटि-पिट्टी । »

अम्मा भई बाँवली..

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ बूत नाइ तबहूँ लाठी लइकई दिनु भरि आइसी–वइसी दऊरईं । अम्मा भई बाँवरी… बहुरिया लईके आवइ खाना बुदु बुदु बुदु बुदु अम्मा ब्वालई। अम्मा भई बाँवली… »

अम्मा भई बाँवली..

सीतापुरिया अवधि:- राति क द्याखँइ चांद-सितारा दिनमाँ चांद निहारइ दिन भरि छोटुआ-छोटुआ कहिके अम्मा लाल पुकारइ अम्मा भई बाँवली। टूटी खटिया फटी चटाई जब अम्मा पहुड़इ चरमर-चरमर होइगइ पाई। अम्मा भाई बाँवली… घुटनन माँ तनिकऊ बूत नाइ तबहूँ लाठी लाइकई दिनु भरि आइसी–वइसी दऊरईं । अम्मा भई बाँवरी… बहुरिया लईके आवइ बुदु बुदु बुदु बुदु अम्मा ब्वालई। अम्मा भई बाँवली… »