****kal****

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***कल ***
एक कल बीत गया,और बीतता ही है कोई नहीं रोक सकता उसे
एक कल जो आने वाला हे आएगा ही वो भी
आज बातें कर लें हम कल ना फिर से आयेगा
कल गैरों ने लुटा अपने घाव दे हैं
रोटी हुई आंखों थे आज भी देख ती हूँ बहते हुये
भॅवर में फसी अंधियारे में दुनिया को किया कोई रौशनी की राह दिखएगा
आज -आज की बात कर लें कल न फिर आएगा
किया करें और किस के लिए करें हम बातें बनाना
और दिल बहला रेत का महल ढह जाना
आखिर ये सब क्यू करें हम
अंध विषबशों के साये में फ़सा हमारा दिल
अपने दिल में जलती हुई लो को कोई किया पहचान करायेगा
कुछ समय के लिये आँखों में चमकते जुगनू
कुछ पलों के लिए सियासी गलियारे
सब कुछ बदल के रख देते हैं अनुमन दीप जहान के
कुछ ही पलों में यहाँ अन्धकार छा जायेगा
आज – आज की बातें कलकर लें ये कल न फिर आयेगा
किया हुआ रेशमा की डोर पकड़ क बचपन चला
रस्से जैसी कस्सी जवानी अंध बिस्वाशों की जनि मानी
करवट बदलजीवन का ये सारांश बन रात के बाद सवेरा हैं।
हर झूठ पर सच्चाई का सेहरा हैं
कर दो खुद को इसके नाम ,देश के ऊपर खुद को न्योछावर
ये मौका फिर न मिल पाएगा
हमाज क- आज की बात करें ये बीता हुआ कल न वापिस आयेगा
गौरी गुप्ता २८ /४ /२०१६

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4 Comments

  1. Anirudh sethi - May 26, 2016, 12:48 pm

    bahut achi kavita…very nice..keep it up 🙂

  2. Sridhar - May 26, 2016, 12:50 pm

    sundar kavita…bahut ache

  3. Anil - May 26, 2016, 2:40 pm

    nice

  4. Priya Bharadwaj - May 26, 2016, 3:47 pm

    Simply awesome poetry

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