मैं घायल हूँ…

May 6, 2017 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं घायल हूँ  मग़र मैं तो  कभी  बेचेन  नही होता

सिसकियां  आती  रहती है मग़र मैं तो नही रोता

किसी घायल की बैचेनी सिर्फ घायल समझ़ता है

जख्म का दर्द  समझ़ता है या मरहम समझ़ता है