जिन्दगी उम्र भर की सहेली है एक उलझी हुई पहेली है दरिया है ये समंदर की पूछो न तुम फिर भी प्यासी है ये अकेली है कहो चाहे इसको काँटो का वन कर सको तो […]

ओ देस से आने वाले बता… क्या लाए हो मेरी ऐसी ख़बर जो झूम उठे दिल के मंज़र और दिल हो ये बेखबर… क्या अब भी वहाँ की गलियों में खुशबू वतन की आती हैं […]

वो पान की दुकान वो बरगद की छाँव जहाँ हम मिले.. क्या याद है तुम्हें वो बारिश के छीटें लब पे तेरे जो गिरे सनसनाती हवाएँ वो ठंडी पुरवाई बदन पे तेरे जो चुभे…. क्या […]

तू मेरे पहले, मैं तेरे बाद हूँ ये शर्त भी है हार जीत कौन किसके साथ है जज़्बात से छूटकर, लब खोल बोल तू ये हालात किसके साथ कौन अब आजाद है इश्क भी एक […]

काव्य में कवि मर गया, जब दुनिया उसे बेवफ़ा कह दिया, कोई रत्जगे क्यों करेगा इस मुर्दे पे, उसका जिस्म भी अब मिट्टी हो गया। साँसें धुआँ है उसकी चाह में, लिखता रहता है हर […]

भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने के लिए सरकार ने कई सेल और पोर्टल बनाए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसुनवाई पोर्टल बनाया है, जहां नागरिक सरकारी विभागों और अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते […]

मिज़ाज-ए-गर्दिश-ए-दौराँ1 बदल गया होगा, जो आया है दर पे आज, कल गया होगा। मकाँ-ए-रंक2 में जो आया है इतराता हुआ, ज़रूर वो कल किसी के महल गया होगा। मुकर कर चला गया वो अपने वादे […]

मेरी नज़्म को अपने ज़ेहन 1 में उतर जाने दे, अहसासों को मेरे ज़रा सा असर कर जाने दे। भटकता रहा हूँ ताउम्र अजनबी दुनिया में, तेरी ज़िंदगी में अब मुझे घर कर जाने दे। […]

जुगनुओं का क़त्ल करने, काली रात आई है, माहताबों 1 ने अपनी सूरत, बादलों में छुपाई है। सहर का नाम मत लो, शब न ख़त्म होगी कभी, तूफ़ानों के तांडव ने, हर तरफ़ तबाही मचाई […]

जिंदगी को जिंदगी से जुदा कर रखा है, हमने अपनी मौत का गुनाह कर रखा है। बस्ती को रोशन करने की ख़ातिर हमने, अपना घर शब-भर 1 जला कर रखा है। रह न जाएं तनहा […]

क्या बताएँ आपको दास्ताँ-ए-दिल 1 अब हम, क़त्ल कर के ख़ुद का, हुए क़ातिल अब हम। तमीज़दार ख़ल्क़ 2 में तमाशबीन 3 हम बन गए, मुहज़्ज़ब 4 बज़्म में, इकलौते जाहिल अब हम। समंदर-ए-इश्क़ में […]

आपकी बेरहम यादें और मैं, बहुत सारी फरियादें और मैं। चुप रहेंगी खींचकर आज साँसें, मेरी बेबस निनादें 1 और मैं। इंतज़ार कर रही हैं बरखा 2 का, सूखी पड़ी ये आँखें और मैं। लगा […]

मर्ज़ 1 नहीं मालूम गर तो दवा न दीजिए, बुझा न सको आग तो, हवा न दीजिये। छुपा लो जख्म-ओ-दर्द ज़ेहन 2 में कहीं, यूँ ही पिघल कर, जू-ए-रवाँ3 न कीजिये। कुचल देती है दुनिया […]

साथ तो सब हैं, फिर भी तनहा सफ़र अपना, हज़ारों मकाँ की बस्ती में, अकेला घर अपना। तुम हो ख़ामोश, मैं भी गुमशुम-सा हूँ यहाँ, तूफ़ाँ में झुकाए सर बैठा है शजर1 अपना। दुनिया के […]

शजर1 सूखा है, खिज़ाँ2 अरसे से ठहरी है, लगेगा वक़्त कुछ और, चोट ज़रा गहरी है। लगता है एक और बम पड़ेगा फोड़ना, सुना है सरकार यहाँ की ज़रा बहरी है। मायूस मख़्लूक़ 3 को […]

बेवजह उनका नाम बार-बार याद आता है, ज़ेहन में जमा दर्द आँखों में पिघल जाता है। अब निगाहों ने भी पकड़ ली है दिल की राह, अनजाने चेहरों में भी बस तू नज़र आता है। […]

मुस्कुराता हूँ ग़म को, लिखता जाता हूँ, क़त्ल कर जिंदगी को, मैं जीता जाता हूँ। पन्ने पलटता हूँ जब जिंदगी की किताब के, तेरा नाम ही, हर वरक़1 पर मैं पाता हूँ। जो बातें रह […]

अपने फ़साने-ए-ग़म मैं किसको सुनाऊँ, हाल-ए-दिल-ए-हस्सास1 किसको बताऊँ। ये दिल की उलझन, ये सितम-ए-हयात2, अब इन हालातों को मैं कैसे सुलझाऊँ। हर शख़्स ख़ुश है, अपनी ही दुनिया में, अपनी तन्हाई से मैं किसको मिलाऊँ। […]

ये ग़म मेरे प्यार का उन्वान 1 बन गया, जो था अपना आज अनजान बन गया। मलहम की चाह में सूखे सारे ज़ख़्म, हर ज़ख़्म अब एक निशान बन गया। रहम-ए-इश्क़ की दरकार 2 थी […]

मेरी आँखों से इतना बहा है तू, देखूँ मैं जिस जगह, वहाँ है तू। मुबालग़ा1 नहीं है ये मोहब्बत का, मुत्तसिल 2 है मेरा मकाँ, जहाँ है तू। कैसे देखोगी तुम दर्द का मंज़र, खुली […]

जिंदगी कैसे – कैसे जली देखो, कुंदन – सी 1 निखर चली देखो। ख़िज़ाँ-दीदा2 काँटों से सँवर कर, गुलशन हो गई मेरी गली देखो। मीठी मोहब्बत की तासीर 3 में घुल, निबोली बनी, मिस्री की […]

जिक्र करता हूँ बस हिज़्र1 का, ऐसी बात नहीं, कभी वस्ल2 का कुछ न कहा, ऐसी बात नहीं। ठहरे हुए हैं कई ख़्याल, आकर ज़ेहन3 में मेरे, कोई ख़्याल आँखों से न बहा, ऐसी बात […]

मु’अय्यन 1 मंज़िल न सही, कहीं तो पहुँच जाऊँ, मुकम्मल2 नज़्म न सही, चंद लफ़्ज़ में ढल जाऊँ। इक मुब्हम3 मुअम्मा4 सी हो गई है ज़िंदगी मेरी, जितना सुलझाऊँ, उतना ही मैं उलझता जाऊँ। मेरे […]

लिखा है बस वही, जो दिल पे गुज़री है, कैसे कहें ये शब 1, कैसे अकेले गुज़री है। ओढ़ कर आ गए वो आज मेरे हालातों को, कैसे बताएंगे वो क्या शानों2 पे गुज़री है। […]

दर-दर गिरते रहते हैं, अक्सर संभलने वाले, खाते हैं अक्सर घाव, मरहम रखने वाले। कर लिया था तौबा इश्क़ की गलियों से, मगर मिले हर तरफ़ मोहब्बत करने वाले। किसके ख़्वाबों में खोया रहेगा हमारा […]

जिंदगी अंधेरों में तो हमें गँवानी थी, रोशनी दो पल की जो कमानी थी। जिन्हें हमने ख़ुद से भी करीब माना, वो शख़्सियत असल में बेगानी थी। रैली के जमघट 1 ने जाम2 किए रास्ते, […]

अपने अश्क़ो को हम दफ़नाने आए हैं, दर्द की नई फसल हम उगाने आए हैं। चुनावी वादों को पूरा करेंगे आज वो, अंधी भीड़ को जो आईने बंटवाने आए हैं। इस बार खिलेंगे सूखी दरख़्तों […]

चंद सिक्के मिले हैं मुझे दिनभर की मज़दूरी के, आँखों में आँसू आते हैं मेरी मजबूर मजबूरी के। कौन उठाए आवाज़ आज नाइंसाफ़ी के खिलाफ़, बहुत मालदार होते हैं शख़्स यहाँ जी-हुज़ूरी1 के। क्यों लिखें […]

अब कहाँ वो ज़माना रहा जाँ लुटाने का, रिवाज़¹ नहीं अब रूठे को मनाने का। किसके हवाले करें आज दिल हम अपना, गुज़र गया वह वक़्त दिल लगाने का। हदीस²-ए-गम-ए-यार सुनेगा अब कौन, नया रिवाज़ है […]

आपकी यादों को अश्कों में मिला पीते रहे, एक मुलाक़ात की तमन्ना में हम जीते रहे। आप हमारी हक़ीक़त तो कभी बन न सके, ख़्वाबों में ही सही, हम मगर मिलते रहे। आप से ही […]

आज की शाम, शमा से मैं बातें कर लूँ, उनके चेहरे को अपनी आँखों में भर लूँ। फ़ासले बचे हैं क्यों उनके मेरे दरमियान1, चल कुछ कदम, कम ये फ़ासले कर लूँ। प्यार करना उनसे […]

जब ज़माने ने उसको सताया होगा, मेरा नाम कैसे होंठों में दबाया होगा। सवालों की जब झड़ी लगी होगी, जवाब में कैसे मुझको छुपाया होगा। कहीं कोई तलाश न ले कमरा उनका, मेरी नज़्मों को […]

दो पल में लगी आग, ज़माने में बुझती है, रिश्तों में पड़ी गाँठ, कब-कहाँ खुलती है। जो दे गया दग़ा हमें, वादा-ए-वस्ल 1करके, तुम्हारी शक्ल उस से हू-ब-हू मिलती है। निगल कर तमाम तारों को […]

बिछड़ने के ख़्याल से हम मिलने से डरते हैं, मगर कैसे बताएँ किस कदर तनहा मरते हैं। देख न ले वो हमें, कहीं पुकार न ले दरीचे1 से, उनकी गलियों से हम अब गुज़रने से […]

आज कुरेद गया वो अरसे से जमे जज़्बातों को, कुछ बूँदें फिर से भिगो गईं सूखे रुख़सारों 1 को। दर्द आज फिर से झाँकने लगा तह-ए-दिल से, शायद कोई भरने आया है दिल की दरारों […]

तेरी आवाज़ में अक्सर हम डूब जाते हैं, तुझसे हम हमेशा कुछ कह नहीं पाते हैं। हाल-ए-दिल कैसे करें हम बयाँ अपना, दिल की धड़कन में तुझे ही सजाते हैं। ग़ालिब बना दिया हमें तेरी […]

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे, आईना अब ज़रा सा भी न काबिल-ए-ऐतबार रहा। हमारी मोहब्बत का असर, हुआ उन पर इस क़दर, निखरी ताबिश-ए-हिना1, न वह रंग-ए-रुख़्सार2 रहा। दिखाए मौसम […]