सावन काव्य प्रतियोगिता : महात्मा गांधी

सावन काव्य प्रतियोगिता : महात्मा गांधी

सच्चे प्रजातंत्र में नीचे से नीचे और ऊंचे से ऊंचे आदमी को समान अवसर मिलने चाहिए। प्रजातंत्र के इसी संकल्प लेकर भारत ने आजादी के 73 वर्षों की यात्रा पूरी कर ली है। ऐसे विचारों से सींचने वाले महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर को हुआ था। इस दिन को आपके लिये विशेष बनाने के लिये सावन काव्य प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है| इसमें आपकी सहभागिता अनिवार्य है!

कविता भेजने की आखिरी तारीख: 27 सितम्बर (सन्ध्या 6 बजे)


कविता का विषय : महात्मा गांधी


पुरस्कार :

प्रथम पुरस्कार : ₹ 500 – महात्मा गांधी – Poonam agrawal – 39 Comments
द्वितीय पुरस्कार : ₹ 300 – महात्मा गांधी – Nikhil Agrawal –  33 Comments
तृतीय पुरस्कार : ₹ 200 – गांधी मशाल – राही अंजाना – 16 Comments

नोट : पुरस्कार राशि  पैटीएम के द्वारा भेजी जायेगी|

नियम

– कविता आपकी अपनी लिखी हुई होनी चाहिए तथा कहीं भी प्रकाशित नहीं होनी चाहिए, तथा कविता प्रतियोगिता के विषय से संबधित होनी चाहिए|
27 सितम्बर (सन्ध्या 6 बजे) तक की रचनाओं को प्रतियोगिता के अन्तर्गत स्वीकार किया जाएगा|
– कविता में कम से कम १०० शब्द होने चाहिये तथा कविता की गुणवत्ता उच्च स्तर की होनी चाहिये| ऐसा न होने पर कविता को प्रतियोगिता के अन्तर्गत स्वीकार नहीं किया जायेगा|
– कविता हिंदी या अंग्रेजी में हो सकती है| यदि आप किसी अन्य भाषा में कविता लिखना चाहते है तो आपको उसका हिंदी या अंग्रेजी अनुवाद भी कविता के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य है|
एक कवि द्वारा एक ही कविता को इस प्रतियोगिता के अन्दर स्वीकार किया जायेगा| एक से अधिक कविताये होने पर अधिक कमैंट्स वाली कविता को ही प्रतियोगिता के अन्दर मान्य होगी|
– प्रतियोगिता का परिणाम 2 अक्टूबर (सन्ध्या 8 बजे) को घोषित किया जायेगा|
प्रतियोगिता का विजेता का फैसला कविता को मिले कमैंट (Comments) के आधार पर किया जाएगा| अर्थात, जिस कविता पर सबसे ज्यादा कमैंट होगें, उस कविता का कवि विजेता होगा|
– कमैंट 27 सितम्बर (सन्ध्या 6 बजे) से 2 अक्टूबर (सन्ध्या 6 बजे) तक गिने जायेंगे| इस अवधी से पहले या बाद के कमैंट को शामिल नहीं किया जायेगा| इसके अलावा उस कविता के कवि के कमैंट को भी इस प्रतियोगिता के अन्दर नहीं गिना जायेगा| क़ृपया ध्यान रखें कि एक व्यक्ति के द्वारा एक ही कमेंट मान्य होगा|
– इसी बीच आप अपनी कविता को अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचा कर कमैंट प्राप्त कर सकते हैं|

कविता भेजने का तरीका

– रजिस्टर करने के बाद, आपको सावन की साइट के मैनू में ‘Write a Poem‘ पर क्लिक करना होगा ताकि कविता लिखने वाला पेज खुल सके| वहां आपको पूछी गई कविता की जानकारी तथा कविता डालनी होगी, तथा कविता की कैटेगरी में ‘काव्य प्रतियोगिता’ को चुने| 

नोट

– वोट की प्रमाणिकता बनाये रखने के लिए वोटर को सावन पर लागिन करना अनिवार्य रखा गया है|
–  उपरोक्त समय सीमायें भारत के मानक समय के अनुसार मानी जायेंगी|
– यदि प्रतियोगिता के बारे में कोई समस्या या संदेह है, तो हमें नीचे कमैंट कर के बतायें|
– हर प्रतिभागी को स्पष्ट रूप से सभी नियमों का पालन करना होगा और प्रतिस्पर्धा के संबंध में सावन का निर्णय अन्तिम माना जाएगा|

6 Comments

  1. Kundan Shrivastava - September 26, 2019, 10:17 am

    * सच *

    अब तो
    बाज़ारों में
    बेचारी सच्चाई
    सिसकियाँ भरती हैं
    कोई भी
    ख़रीददार नहीं उनका
    जो भी आता है
    बेईमानी , मक्कारी
    ख़रीद कर ले जाता है
    हां , कभी कभार
    भूला भटका
    कोई जिस्म
    आ जाता है
    ‘ सच ‘ ख़रीदने
    न तन पर
    पूरे कपडे़
    कमबख़्त पेट भी
    पीठ से चिपकी हुई
    फ़िर भी
    ख़रीदने आ जाते हैं सच
    चंद ऐसे ही
    लोगों से
    सच्चाई की झोपड़ी में
    सब्र ओ सुक़ून की
    अंगिठियां जलती हैं
    तभी तो
    वो आज भी
    बापू ( गांधी ) के
    इस देश में
    ज़िंदा है… ! ! !
    – कुन्दन श्रीवास्तव

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 27, 2019, 9:31 am

    मेरे बापू गांधीजी

    दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था
    सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था
    राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था
    हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था

    गर्व था देशवासियों को बापू के हुंकार पर
    ऐंनक पहने लाठी लेकर देश को आजाद किया
    खट्‌ खट्‌ की आवाज में बापू का प्यारा संदेश था
    चरखे के बल पर बापू ने रचा स्वर्णीम इतिहास था

    गोरों को औकात दिखाया उनके ही चालो में
    राष्ट्रहित में ध्वजा फहराकर देश का मान बढ़ाया
    बापू के पीछे पीछे हिन्द सेना जब चलती थी
    गोरों कि फौज डरें सहमे छिपते फिरती थी

    गोरों के अत्याचारों से गली मोहल्ला थर्राया था
    बापू ने अपने आंदोलन से गोरों को पस्त किया था
    गोरे शैतानों को उनके भाषा में सबक सिखाया
    बापू के चरणों का मैं शीश झुका वन्दन करता हूं

    महेश गुप्ता जौनपुरी

  3. Kundan Shrivastava - September 27, 2019, 6:05 pm

    वाह वाह

  4. Shyam Kunvar Bharti - October 1, 2019, 7:39 pm

    बहुत खूब

  5. Dinesh Chandra joshi - October 2, 2019, 1:50 pm

    जय हो

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