Tag: देश भक्ति कविता डाउनलोड

  • एक संवाद तिरंगे के साथ।

    जब घर का परायों का संगी हुआ।

    क्रोधित तेरा शीश नारंगी हुआ।

    ये नारंगी नासमझी करवा न दे।

    गद्दारों की गर्दने कटवा न दे।।

    साँझ को अम्बर जब श्वेत हुआ।

    देख लेहराते लंगड़ा उत्साहित हुआ।।

    श्वेताम्बर गुस्ताखी करवा न दे।

    मेरे हाथों ये तलवारें चलवा न दे।।

    तल पे हरियाली यूँ बिखरी पड़ी।

    खस्ता खंडहरों में इमारत गड़ी।।

    ये हरियाली मनमानी करवा न दे।

    गुलमटों को अपने में गड़वा न दे।।

    तेरा लहराना मुसलसल कमाल ही है।

    तेरी भक्ति करूँ क्यूँ?निरुत्तर सवाल ही है।।

    तेरी लहरें मेरे रक्त को लहरा न दें।

    कहीं हर तराने में तुझे हम लहरा न दें।।

  • वन डे मातरम

    स्वतंत्र हैं हम देश सबका।

    आते इसमें हम सारे

    हर जाती हर तबका।।

     

    सोई हुई ये देशभक्ति

    सिर्फ दो ही दिन क्यूँ होती खड़ी।

    एक है पंद्रह अगस्त और

    दूसरा छब्बीस जनवरी।।

     

    देश रो रहा रोज़ रोज़

    फिर एक ही दिन क्यों आँखे नम

    अब बंद करदो बंद करदो

    ये वन डे वन डे मातरम्

     

    देखो कितना गहरा सबपर

    दिखावे का ये रंग चढ़ा।

    एक दिन तिरंगा दिल में

    अगले ही दिन ज़मीन पे पड़ा।।

     

    उठते तो हो हर सुबह

    चलो उठ भी जाओ अब तुम

    सो रहे हो अब भी अगर तो खा लो थोड़ी सी शरम।

    अब बंद करदो बंद करदो

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    सब बातें बोले गोल गोल

    सोच कड़वी,कड़वे बोल

    एक दिन हो जाते मीठे खा के लड्डू नरम नरम।

    अब बंद करदो बंद करदो

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    राष्ट्र ध्वज में तीन रंग

    तीन बातों के प्रतीक हैं।

    सम्मान करना है इन्ही का

    ये जान ले ये सीख लें।।

     

    सफ़ेद कहता रखो शांति

    साथ दो सच्चाई का।

    पर झूठा शान से फिर रहा और

    सच्चा मोहताज पाई पाई का।।

     

    केसरिया हम सभी को

    देता एक उपदेश है।

    हिम्मती बनो तुम सारे

    बलिदानो का ये देश है।।

     

    हरा निशानी समृद्धि का

    देता विविधता का ज्ञान है।

    मगर भारतीय होने से पहले

    लोग हिन्दू-मुसलमान है।।

     

    ये रंग हवा में लहरा रहे

    इन्हें मन में भी फैला ले हम।

    चलो बंद करदें बंद करदें

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    देश के हर ज़ख्म का

    हमारे पास मरहम है।

    इन निहत्थे हाथों में

    धारदार कलम है।।

     

    रूढ़िवादी खंजरों पर

    अब चल जाने दें ये कलम।

    चलो बंद करदें बंद करदें

    ये वन डे वन डे मातरम्।।

     

    दूसरों का इंतज़ार क्यूँ

    तुम ही करदो अब पहल।

    एक दिन में क्या बन सका है

    घर,ईमारत या महल।।

     

    याद करलो आज सब

    कर्म अपना,अपना धर्म

    चलो राष्ट्र निर्माण में बढ़ाये छोटे छोटे से कदम।

    अब बंद करदें बंद करदें

    ये वन डे वन डे मातरम्।

  • अमन की कुछ बात

    अमन की कुछ बात

    दरिया में बहा दो रंजिश सब
    अब अमन की कुछ बात हो जाये
    मेरे देश में खुशहाली हो
    बस इत्मिनान से मुलाकात हो जाये
    एक अनोखी ख्वाहिश सी
    सजी जमीन है फ़ुर्सत से
    अब माटी के पहलू से
    कुछ नई फ़सल-सौगात हो जाये
    जब सारे अरमान देख लिये
    क्यों अपने प्यारे खफ़ा हुए
    आज मिली आज़ादी में
    फ़िर ईद-मिलन दस्तूर हो जाये
    मैं सब्र में आज डूबा हूँ
    कुछ दूर चलके रोया हूँ
    वजूद को अपने ढूँढू हर दम
    मैं फ़िर कहीं जाके खोया हूँ

    रेत के घरोंदो को छोड़ो
    अब टूटे सपनों को खोजो
    मेरे साथ चलो,नई आवाज़ लिये
    आज फिर एक ख्वाब एक उम्मीद हो जाये..

    – Rajat

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