स्वतंत्रता दिवस पर निबंध

एक संवाद तिरंगे के साथ।

जब घर का परायों का संगी हुआ। क्रोधित तेरा शीश नारंगी हुआ। ये नारंगी नासमझी करवा न दे। गद्दारों की गर्दने कटवा न दे।। साँझ को अम्बर जब श्वेत हुआ। देख लेहराते लंगड़ा उत्साहित हुआ।। श्वेताम्बर गुस्ताखी करवा न दे। मेरे हाथों ये तलवारें चलवा न दे।। तल पे हरियाली यूँ बिखरी पड़ी। खस्ता खंडहरों में इमारत गड़ी।। ये हरियाली मनमानी करवा न दे। गुलमटों को अपने में गड़वा न दे।। तेरा लहराना मुसलसल कमाल ही है। तेरी भ... »

वन डे मातरम

स्वतंत्र हैं हम देश सबका। आते इसमें हम सारे हर जाती हर तबका।।   सोई हुई ये देशभक्ति सिर्फ दो ही दिन क्यूँ होती खड़ी। एक है पंद्रह अगस्त और दूसरा छब्बीस जनवरी।।   देश रो रहा रोज़ रोज़ फिर एक ही दिन क्यों आँखे नम अब बंद करदो बंद करदो ये वन डे वन डे मातरम्   देखो कितना गहरा सबपर दिखावे का ये रंग चढ़ा। एक दिन तिरंगा दिल में अगले ही दिन ज़मीन पे पड़ा।।   उठते तो हो हर सुबह चलो उठ भी जाओ अ... »

अमन की कुछ बात

अमन की कुछ बात

दरिया में बहा दो रंजिश सब अब अमन की कुछ बात हो जाये मेरे देश में खुशहाली हो बस इत्मिनान से मुलाकात हो जाये एक अनोखी ख्वाहिश सी सजी जमीन है फ़ुर्सत से अब माटी के पहलू से कुछ नई फ़सल-सौगात हो जाये जब सारे अरमान देख लिये क्यों अपने प्यारे खफ़ा हुए आज मिली आज़ादी में फ़िर ईद-मिलन दस्तूर हो जाये मैं सब्र में आज डूबा हूँ कुछ दूर चलके रोया हूँ वजूद को अपने ढूँढू हर दम मैं फ़िर कहीं जाके खोया हूँ रेत के घरोंदो ... »

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