अँधेरा कहीं भी हो दूर होना चाहिए

अँधेरा कहीं भी हो दूर होना चाहिए,
सूरज न सही दिए के माफ़िक जलना चाहिए,
क्या हुआ जिंदगी में उदासियाँ बहुत हैं,
औरों की ख़ुशी देखकर भी मुस्कुराना चाहिए।

Comments

4 responses to “अँधेरा कहीं भी हो दूर होना चाहिए”

  1. ashmita Avatar

    आपने तो दुष्यंत जी की कविता की याद दिला दी

    1. मोनू कुमार Avatar
      मोनू कुमार

      शुक्रिया।

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