अपने मित्रों की पीर हरण

अपने मित्रों की पीर हरण ,
जो करता है ।
मित्रता -कसौटी , जगजाहिर,
वो करता है ।
जब विपदाओं के ,चक्रव्यूह में,
मित्र फँसे ,
फिर अर्जुन जैसा बन कर मित्र ,
कर्तव्य उजागर करता है ।
जानकी प्रसाद विवश

प्यारे मित्रो ,
मनोहर सवेरे की , अनुपम घड़ियों में ,सपरिवारसहर्ष , हमारी मंगलकामनाएँ स्वीकार करें ।
आपका हर पल सत्य-शुभ , सुंदर हो ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close