आ गया अब शीत का मौसम

आ गया अब शीत का मौसम
कंपकंपी के गीत का मौसम ।
झील सरिता सर हैं खामोश
अब न लहर में तनिक भी जोश
वृक्ष की शाखें नहीं मचलें
लग रहा अब है न तनिक होश

धूप के संगीत का मौसम
गर्मियों के मीत का मौसम

उमंगों पर है कड़ा पहरा
जो जहां पर है वहीं ठहरा
किसलिये है भावना वेवश
शीत का यह राज है गहरा

शीत से है प्रीत का मौसम
धूप से विपरीत का मौसम।

अधर तक मन का धुँआ आता
दर्द का हर छंद दोहराता
चुभन की अनुभूति क्या प्यारी
आँसुओं का सिंधु लहराता

लगा मन की जीत का मौसम
आ गया मन मीत का मौसम।
निरंतर पढ़ते रहें रचना संसार…..

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

कोरोनवायरस -२०१९” -२

कोरोनवायरस -२०१९” -२ —————————- कोरोनावायरस एक संक्रामक बीमारी है| इसके इलाज की खोज में अभी संपूर्ण देश के वैज्ञानिक खोज में लगे हैं | बीमारी…

Responses

New Report

Close