इन्द्र धनुषी-अभिवादन

**इन्द्र धनुषी-अभिवादन”**
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मित्रता का महकता रहे चंदन ,
मित्रता का मन करे हर पल वंदन. ।
अमर रहें मित्रता के अक्षय कोष मे ,
जग करे मित्रता का हरपल अभिनन्दन ।

प्यारे मित्रो ,
प्यार के चटकीले रंगों के
रम्य छटामय सवेरे की
मंगलकामनाएँ,
सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें ।

आपका अपना मित्र ,
जानकी प्रसाद विवश

जानकी प्रसाद विवश

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