उस अफ़साने की बात करते हो

सिमट गया जो चंद अल्फ़ाजों में, उस अफ़साने की बात करते हो

खुद को हमारी जिंदगी बनाकर, छोड जाने की बात करते हो |

 

नहीं है कोई अंजाम इस अफ़साने का, मालूम था हमें

जला रखा था इक उम्मीद का चिराग़, उसे बुझाने की बात करते हो |

 

पहले से दफ़न है कई अहसास मेरे दिल की दरख्तों में

कत्ल करके इक और अहसास का, दफ़नाने की बात करते हो |

 

गये है तेरे दर पर हम, अपना सबकुछ छोडकर

अब खुद को छोडकर, लोट जाने क़ी बात करते हो

Comments

9 responses to “उस अफ़साने की बात करते हो”

  1. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    nice one!

    1. Vipendra Pal Singh Avatar
      Vipendra Pal Singh

      thanks mohit

  2. अंकित तिवारी Avatar

    Katal-e-aam macha diya aapne…. Bhut hi sunder

    1. Vipendra Pal Singh Avatar
      Vipendra Pal Singh

      thanks ankit

  3. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    wow!…nice bro!

  4. राम नरेशपुरवाला

    Good

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

  6. Satish Pandey

    वाह वाह

  7. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

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