उस अफ़साने की बात करते हो

सिमट गया जो चंद अल्फ़ाजों में, उस अफ़साने की बात करते हो

खुद को हमारी जिंदगी बनाकर, छोड जाने की बात करते हो |

 

नहीं है कोई अंजाम इस अफ़साने का, मालूम था हमें

जला रखा था इक उम्मीद का चिराग़, उसे बुझाने की बात करते हो |

 

पहले से दफ़न है कई अहसास मेरे दिल की दरख्तों में

कत्ल करके इक और अहसास का, दफ़नाने की बात करते हो |

 

गये है तेरे दर पर हम, अपना सबकुछ छोडकर

अब खुद को छोडकर, लोट जाने क़ी बात करते हो

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