कभी खुद को मदारी

कभी खुद को मदारी

कभी खुद को मदारी बना दिया
कभी खुद ही तमाशा बन गए

कभी खुद सिमट कर बैठ गए
कभी खुद ही दिलासा बन गए

राजेश’अरमान’


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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

2 Comments

  1. Sridhar - May 8, 2016, 10:40 pm

    अति सुन्दर राजेश जी |

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 11:16 pm

    वाह बहुत सुंदर

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