की परवरिश जिन

की परवरिश जिन ख़्वाबों की औलाद की तरह
दफ़न कर मुझे फ़र्ज़ निभाया औलाद की तरह
राजेश’अरमान

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खुशियों की सौगात होती है औलाद, जीवन का संगीत होती है औलाद, माता-पिता की गर अच्छी हो औलाद, बुढ़ापे की लाठी होती है औलाद, फल…

किसने कितना फ़र्ज निभाया ??

किसने कितना फ़र्ज निभाया, किसने कितने पत्थर फेंके… हमने इस कठिनाई के दौर में, लोगों के असली चेहरे देखे… डॉक्टर,पुलिस और सफ़ाईकर्मियों में जीवन्त मानवता…

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