ख्वाबों के दरमियाँ सवाल आ गये हैं By Mithilesh Rai Posted on January 19, 2016November 26, 2018 Category : हिन्दी-उर्दू कविता ख्वाबों के दरमियाँ सवाल आ गये हैं! नाकामियों के फिर ख्याल आ गये हैं! उठ रहीं हैं लहरें इसकदर यादों की, दर्द बनकर सूरत-ए-मलाल आ गये हैं!
wah..kya baat he
शुक्रिया
nice
Very nice
बहुत सुंदर पंक्तियां