गर खुदा होना

गर खुदा होना ही मंज़िल है
हाथों में गलत नक़्शा क्यों ?
राजेश’अरमान’

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ऐसा क्यों है

चारो दिशाओं में छाया इतना कुहा सा क्यों है यहाँ जर्रे जर्रे में बिखरा इतना धुआँ सा क्यों है शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात…

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