चंद लकीरों में बसी बचपन की सारी यादें

चंद लकीरों में बसी बचपन की सारी यादें

वो स्कूल का यूनिफार्म,
वो काले, और सफ़ेद पीटी के जूते,
वो टाईमटेबल के हिसाब से किताबें रखना,
वो माँ के हाथों से बनी टिफ़िन,
वो पापा से डायरी का छुपाना,
वो दोस्तों की शरारतें,
वो टीचर का डांटना,
वो बेपरवाह भागना, दौड़ना,
वो सब भूल तो नहीं गए?
वो सब याद है कि नहीं?

– Udit Jindal

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10 Comments

  1. Kavi Manohar - August 26, 2016, 5:19 pm

    Nice

  2. Sridhar - August 26, 2016, 6:29 pm

    bachpan ki yaad dila di janaab aapne

  3. Ajay Nawal - August 26, 2016, 11:58 pm

    nice poem

  4. Deepa Singh - August 27, 2016, 3:56 pm

    bahut khoob 🙂

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 11:01 pm

    वाह बहुत सुंदर

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