चाँद और सितारों की चाँदनी को भूलाकर ढूंढते हैं,
चलो आज सब जुगनू की रौशनी के सहारे ढूंढते हैं,
हुए बहुत दिन गहरे समन्दर की बाँहों में झूलते,
चलो आज मिलकर हम सब उथले किनारे ढूंढते हैं,
जिंदगी के सफ़र में ‘राही’ डूबने से बचना है अगर,
तो चलो आओ सब छोड़ कर ज्ञान के शिकारे ढूंढते हैं।।
राही (अंजाना)
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