जब किसी सितम की कभी इन्तहाँ होती है

जब किसी सितम की कभी इन्तहाँ होती है!
सोती हैं ‘तकदीरें मगर आँख रोती है!
वक्त के कदमों तले कुचल जाती हैं मंजिलें,
डूबती तमन्नाओं की सहर कब होती है?

Composed By #महादेव

Comments

2 responses to “जब किसी सितम की कभी इन्तहाँ होती है”

  1. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    nice 1

  2. Abhishek kumar

    Wow

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