जिल्द बिन किताब का

जिल्द बिन किताब का
फूल बिन हिज़ाब का
रातों का नहीं
ख्वाब हूँ आफताब का


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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

2 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 11:21 pm

    बहुत सुंदर

  2. Abhishek kumar - May 17, 2020, 12:57 pm

    👏👏

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