Site icon Saavan

तलाक

तलाक

क्या सच में ही

होता है इतना आसान

चंद तारीखे

कुछ ज़िरहे

दो दस्तखत

खोल दी गिरहे

बस निकल लिए

पकड़ ख़ुद की राहे

हो गए क्या सब हिसाब

बँट गए क्या सब हिस्से

उनका क्या

जो दे भी गए

और ले भी गए

बेशुमार वोह पल

गमो के भी

प्यार के भी

करते भी कैसे

उनका बँटवारा

उनका हिसाब क्यों

किसी कचहरी ने

ना तौला, ना गिना

बस छोड़ दिया

हमको हमारे सहांरे

तुमने तो ज़िकर

भी ना किया उनका

लगा होगा तुमको

के इनका क्या मोल

यह क्या कर दिया आपने

समझाता रहा उमर भर

कभी सौदा ना करना

चूक जाओगे, चूक गए

बेशकीमती हीरे छोड़ दिए

पत्थर भर कर चल दिए

                …… यूई

Exit mobile version