देखा जब भी लहरों को मचलते

देखा जब भी लहरों को मचलते
समुन्दर की गोद में
लगता कोई बच्चा मचल रहा है
अपनी माँ की गोद में
देखा जब भी बादलों को मचलते
आसमां की गोद में
लगता कोई युवा मचल रहा है
अपनी ख्वाइशों की गोद में
देखा जब भी जमीं की रेत तपते
किसी सेहरा की गोद में
लगता कोई बुढ़ापा तप रहा है
अपनी परछाइयों की गोद में
राजेश’अरमान’

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