देश बेहाल है

हर विभाग आज सुस्त और बेहाल है
काम कुछ नही सिर्फ़ हड़ताल है ।

भ्रष्ट्राचार का तिलक सबके भाल है
भेड़िये ओढे भेड़ की खाल है।

उपरवाले तो तर मालामाल है
हमारे खाते में आश्वासनों का जाल है।

घोटालो से त्रस्त देश कंगाल है
नेता बजा रहें सिर्फ़ गाल है।

लोकतंत्र की बिगड़ी ऐसी चाल है
ईमानदार मेहनती जनता फटेहाल है।

चोर पुलिस नेता की तिकरी कमाल है
राजनीति जैसे लुटेरों का मायाजाल है।


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जोगबनी-कटिहार छोटी रेल खंड के बिच की यात्रा के दौरान कविता ही मेरी संगिनी रही. हास्य, व्यंग्य, ग़ज़ल कहना सुनना अच्छा लगता है.

5 Comments

  1. Sulabh Jaiswal - June 18, 2015, 6:05 pm

    Share more poetry on socio-economic condition of our country

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 30, 2019, 11:43 pm

    वाह बहुत सुंदर

  3. Satish Pandey - August 22, 2020, 3:38 pm

    Very Nice

  4. Satish Pandey - August 22, 2020, 10:55 pm

    बहुत खूब

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