मुक्तक

तेरे बगैर मुझको कबतक जीना होगा?
जामे-अश्क मुझको कबतक पीना होगा?
भटकी हुई है जिन्द़गी राहे-सफर में,
जख्मे-दिल को हरपल कबतक सीना होगा?

#महादेव_की_कविताऐं’


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

4 Comments

  1. Anirudh sethi - February 27, 2017, 12:58 am

    nice

  2. Ajay Nawal - February 27, 2017, 9:57 am

    nice

  3. सीमा राठी - February 27, 2017, 10:00 am

    wonderful

  4. Abhishek kumar - November 25, 2019, 9:36 pm

    Awesome

Leave a Reply