मुक्तक

सूरज को रोशनी का गुमान किसलिए है?
शाम तन्हाई की पहचान किसलिए है?
टूटते नजारे हैं फिजा में हरतरफ,
रात आहटों की मेहमान किसलिए है?

मुक्तककार- #महादेव’

Comments

4 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Achhi rachna

Leave a Reply

New Report

Close