मुक्तक

तेरे दिल की बात बदल न जाए कहीं!
वक्ते-मुलाकात निकल न जाए कहीं!
कब तक करूँ यकीन तेरे प्यार पर?
तन्हाई में रात ढल न जाए कहीं!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Responses

  1. रोशनी है अभी आ जाओ, शमा जल रही है
    मोम मोहब्बत की कहीं पिघल न जाए कहीं

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