मेरे जख्मों पर तुम मुस्कराना

मेरे जख्मों पर तुम मुस्कराना आँशू न बहाना
मुस्कराहट मरहम,आँशू नमकीन होते हैं।
** ” पारुल शर्मा ” **

Related Articles

चाय और नमकीन

तुम नमकीन थी मैं चाय था दोनो एक प्लेट में आकर मिलते थे वहीं से हमारी गुड मॉर्निंग शुरू होती थी बगल वाली प्लेट के…

कैसे होते हैं……!

कैसे होते हैं……! ——————————— कोई पहचान वाले अनजान कैसे होते हैं जानबूझ कर कोई नादान कैसे होते हैं बदलता है मौसम वक़्त और’लम्हें सुना हेै–…

मरहम

यादों की मरहम भी क्या मरहम है। बेरहम भी मरहम पर जीने लगे है।। काश.. यह मरहम मर्ज़ नहीं होते। हम और आप आज कैसे…

Responses

New Report

Close