चला गया है परदेश हमारा लाल पूँछ लेता है फोन पर कभी कभी हमारा हाल चाल   बेटा— बहुत बिजी हूँ माँ टाइम नहीं मिलता कब आऊँगा वहाँ मुझे भी नहीं पता कैसी हो माँ […]

चलो अपनी असलह रूपी कलम को बारूद से लबरेज कर लें,और दाग दें दुश्मनों और गद्दारें के तन पर कि शब्दों के बम रूपी गोले लहूलुान कर दें,ध्वस्त कर दें उनके नापाक इरादों को। सुना […]

अनुच्छेद 370 का ही परिणाम हैं जो कश्मीर में अब भी तिरंगे जलते हैं। पथराव होता है देश भक्तों पर और जवानों के तन पे जख्म पलते है। दुश्मन की कायरता का मनोबल बढ़ता है […]

।। गम बनाम खुशी ।। गम बोला खुशी से —-बता बता दो जा रही हो जिसकी जिंदगी से। खुशी—वहाँ तो मेरा आना जाना लगा रहता है मैं देख नहीं सकती उनके दुखी चेहरे, तुम जाते […]

—————– वधू चाहिए ———— आये लड़के वाले छपवाने इस्तहार मेरी संजीवनी में एक वधू चाहिए आ गयी है कड़की घर में है परिवार छोटा सा घर गिरवी पड़ा है। ५ लड़कों ४ लड़कियों  से जूझ […]

  ।। गम बनाम खुशी ।। गम बोला खुशी से —-बता बता दो जा रही हो जिसकी जिंदगी से। खुशी—वहाँ तो मेरा आना जाना लगा रहता है मैं देख नहीं सकती उनके दुखी चेहरे, तुम […]

औरतों के घर कहाँ होते हैं जहाँ पैदा हुई वो मायका जहाँ शादी हुई वो ससुराल।औरतों के अपने कहाँ होते हैं।एक के लिए पराया धनदूजे के लिये पराये घर से आयी परायी लड़की। औरतों के […]

सफेद दरख्त अब उदास हैं जिन परिंदों के घर बनाये थे वो अपना आशियाना ले उड़ चले। सफेद दरख्त अब तन्हा हैं करारे करारे हरे गुलाबी पत्ते जो झड़ गये परिंदो के पर उनके हाथों […]

इश्क के बाजार में दिल की तिजारत यूँ हुई सपनों के बदले नींद गयी बङी हिफाजत से रखा था प्यार दिल में रूह,दिल,नजर दिमाक आ गये हिरासत में खामोशी की लब्जों से बागाबत यूँ हुई […]

जिन्दगी का फलसफा कौन समझ पाता है हालात बदलते है नहीं वक्त गुजर जाता है कल ये हुआ,कल क्या होगा इस कशमकश में, पल पल पिस जाता है कल बदलता है नहीं आज बिगड़ जाता […]

बूँद बनी तेजाब कण बना अंगार ध्वनी शूल बनी वायू बनी आग इलेक्ट्रोंनिक्स के महीन कटीले झाड़ वाहनों,फेक्ट्रीयों के धुँये का जंजाल भूमी में रिसते दूषित पदार्थ तरकारी,फल,फसल,दूध में डले जहरीले पदार्थ ओजोन परत में […]

इस कलि को मुस्कुराने दो कोख से धरती की गोद में आने दो बिखेर देगी चारोंतरफ खुशियाँ खुल के तो इसे मुस्कुराने दो। बेटी को घरस में आने दो।>2 रोपित करो इसे अपने आँगन में […]

मंदिर में पानी भरती वह बच्ची चूल्हे चौके में छुकती छुटकी भट्टी में रोटी सा तपता रामू ढावे पर चाय-चाय की आवाज लगाता गुमशुदा श्यामू रिक्से पर बेबसी का बोझ ढोता चवन्नी फैक्ट्रीयों की खड़खड़ […]

।। माँ ।। वो दूर गया है परसों से माँ सोई नहीं है बरसों से माँ की आँखों से ही तो घर-घर में उजाला है। ए वक्त,ए हवा,ए फिज़ा जरा संभल मुझे कम न समझ […]