मेरे मोहल्ले में स्कूल खुलने दो

 

मेरे मोहल्ले में
न मंदिर बनाओ
न मस्ज़िद बनाओ
यदि बनाना ही है
तो एक स्कूल बनाओ

मेरे मोहल्ले में न गीता का पाठ हो
न जुमे की नमाज़ हो
अगर पाठ कोई हो तो
वह इंसानियत का पाठ हो

मेरे मोहल्ले में
न पंडित को भेजो और न पूजा को भेजो
न क़ाज़ी को भेजो और न नमाज़ी को भेजो
अगर भेजना ही है
तो शिक्षा को भेजो और शिक्षक को भेजो

मेरे मोहल्ले में
न हिन्दू बनाओ
और न मुसलमान बनाओ
इंसान को इंसानियत से घेरो
और इंसान बनाओ

मेरे मोहल्लों को
इंसानो की बस्ती ही रहने दो
मेरे मोहल्ले में
एक स्कूल खुलने दो ।

तेज

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Lives in New Delhi, India

2 Comments

  1. Panna - May 6, 2016, 4:07 pm

    behatreen sir!!

  2. Anirudh sethi - May 6, 2016, 4:10 pm

    nicely framed poetry….importance of school is well said 🙂

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