मोहब्बत और दुशमनी

मोहब्बत और दुशमनी जो दिल से निभाते है
बस वही शख्स दुनिया में जी पाते है
दीन – दुखियों की जो सेवा करते हैं
बस वही लोग ईश्वर को रिझाते हैं
गिरते हुये को जो धरा से उठाते है
वह न कभी संसार सागर में ठोकरे खाते हैं
अपने गुरु की राह पर जो चलते हैं
शायद वही एक दिन अवश्य कवि बन जाते हैं
रीता जयहिंद
9717281210

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