यह इश्क़ है।

चंचल , अल्हड़ , बेपरवाह , बेफिक्र ,
यह इश्क़ है।
प्रीतम क़े जाने पर  जो  प्रेयसी को कर दे बाबरा ,
यह इश्क़ है।
जिसके दम  पर मीरा जहर का प्याला बेहिचक पी गई ,
यह इश्क़ है।
नटराज और माँ शक्ति का जिसने मिलन है करवाया ,
यह इश्क़ है।
तरसती रहती है धरती बादलों की उस एक बूँद के लिए ,
यह इश्क़ है।
उसकी इक आवाज सुनने के लिए जो बेचैन है कर देता ,
यह इश्क़ है।
जो सारे ब्रह्माण्ड को है रच गया ,
यह इश्क़ है ,
चंचल , अल्हड़ , बेपरवाह , बेफिक्र ,
यह इश्क़ है।
–  अभिषेक शर्मा

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