युँ तो देखे

युँ तो देखे

युँ तो देखे हर पल रंग ज़िंदगी के
समुंदर ने बख्शे दिन तिश्नगी के

युँ तो काफिलें भी थे मंज़िलें भी
तलाश रही मुकाम पाकीजगी के

राजेश’अरमान’


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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

2 Comments

  1. Sridhar - May 8, 2016, 10:42 pm

    सुन्दर पंक्तियाँ |

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 11:17 pm

    वाह वाह

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