राजेश”अरमान”

वज़ूद आईने का सामने आ गया
जब कोई पत्थर से ठोकर खा गया

तब से सम्भाल रखता हूँ ज़ख्मों को
जब कोई दोस्त नमक ले आ गया

राजेश”अरमान”

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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

2 Comments

  1. Sridhar - June 26, 2016, 1:29 pm

    nice …

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 12, 2019, 11:16 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां

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