विचारों को जब

विचारों को जब बाँध रही थी,

अरमानों के साँचे ढाल रही थी,

खिन्न हुई, उद्वगिन हुई  जब,

खुद को मैं आँक रही थी ।
विचारों को खोल  चली जब,

निरन्तर  प्रवाह से जोड़ चली जब,

आशा-निराशा  छोड़ चली जब,

जीवन संग आन्नदित हूँ।
कर्तव्यो की जो होली है,

रंग-बिरंगी  आँख मिचोली है,

संग मैं हूँ, जीवन की जो भी बोली है ।।

https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2016/10/15/


 

Related Articles

जागो जनता जनार्दन

http://pravaaah.blogspot.in/2016/11/blog-post_75.htmlसमाज आज एक छल तंत्र की ओर बढ़ रहा है प्रजातंत्र खत्म हुआ। अराजकता बढ़ रही, बुद्धिजीवी मौन है या चर्चारत हे कृष्ण फिर से…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

आज़ाद हिंद

सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत  ! अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन  !! सूर्य व अनेक उपागम् , ! किंतु मुख्य नॅव खण्डो  !!   मे पृथ्वी…

माँ हूँ मैं

ममता की छाँव तले , समता का भाव लिए, इंसानियत का सभी में, संचार चाहती हूँ, माँ हूँ मैं,हाँ भारत माँ, एकता और सदभाव का,…

परिहास बनी

परिहास बनी पल दो पल के, उन्मादित पलों को, प्रेम समझ परिहास बनी, कोमल एहसासों को अपने, पाषाण में तराश  रही, क्षणभंगुर जगत में, अमरता…

Responses

    1. Vichaaron ko jab baandh rahee thee,

      aramaanon ke saanche ḍhaal rahee thee,

      khinn huii, udvagin huii jab,

      khud ko main aank rahee thee . Vichaaron ko khol chalee jab,

      nirantar pravaah se jod chalee jab,

      aashaa-niraashaa chhod chalee jab,

      jeevan sng aannadit hoon. Kartavyo kee jo holee hai,

      rng-birngee aankh micholee hai,

      sng main hoon, jeevan kee jo bhee bolee hai ..

New Report

Close