वो बारिश का मौसम

वो बारिश का मौसम
वो गरम गरम जलेबी
वो धुआं छोड़ती चाय
छतों से टपकता पानी
छातों का साफ़ कर घर से निकलना
पानी से छप छप करते खेलना
जान बुछकर भीगना
ओटली पर कतार में लगना
अपनी बारी का इंतज़ार करना
कुछ भी तो नहीं बदला
सब वैसा का वैसा ही तो है
फिर क्या हो गया ऐसा
जिसे हम पकड़ नहीं पा रहें है
या फिर पकड़ना नहीं चाह रहें है
शायद ये तेज रफ़्तार का खेल है
और हम भी कुछ थक से गए है
राजेश’अरमान’

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