सरस्वती वंदना

 

सुनो शारदे ज्ञानदायनी,

विनती मेरी बारम्बार ।
भँवर बीच में नैया मेरी,
आकर मात लगाओ पार ।।
तम का साया मुझ पर छाया,
अंधकार से मात उबार ।
मुझे सद्बुध्दि स्मरण शक्ति दो,
मिट जाए अज्ञानी विकार ।

कण-कण जोत जलाओ देवी,
बहे ज्ञान की गंगा धार ।
तुमने सबको राह दिखाई,
मेरा भी पथ करो तैयार ।।

धरा आसमां महिमा गाते,
सब जन करते जय जैकार ।
कृपा करो,हे ! माँ जगदम्बे,
हो जाए मेरा उद्धार ।।

नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष

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