“सुना है”

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सुना है रहजन बहुत हैं तिरी राह पर मयकशी के जाम आँखों से लूटते हैं,
चलों लुटने के बहाने ही सहीं ‘ज़नाब’ तिरी जानिब फिर से हो कर गुजरते हैं,

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Student At Hansraj college , Delhi University

3 Comments

  1. Anushreee Sharma - April 10, 2016, 6:45 pm

    Achi rachna

  2. Ushesh Tripathi - April 10, 2016, 8:35 pm

    Thank u

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 1:53 pm

    वाह बहुत सुंदर

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