सूकून

बच्चे झगड़ रहे थे मोहल्ले के जाने किस बात पर,

सूकून इस बात का था न मंदिर का ज़िक्र था न मस्जिद का |

Related Articles

फेल रिजल्ट

कविता -फेल रिजल्ट —————————- आज सारे, ख्वाब टूट गए, कभी सोचते थें, जो बैठ टहल कर, वो आज सारे ख्वाब टूट गए, मत भरोसा करो,…

बचपन

तितली सी उङती फिरती थी, ठुमक ठुमक कर,इतराती, सारे रंग संजो लेती थी, खुशियों से मुस्काती। माँ-बाबा से बकबक बकबक, भाई से नादां सी खटपट,…

Responses

New Report

Close